खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..
दर्द एक दबा था सालो से जो दिल में ..
जगाकर आज उसे मैं आ रहा हूँ..
तुने तो कह दिया नाराज़ नहीं तू मुझसे ..
मैंने सोचा मैं तुझे मनाकर आ रहा हूँ ..
याद अब भी मुझे करना तेरा ,अच्छा लगा मुझे ..
याद तुझे मैं भी करता करता आ रहा हूँ ..
समझा ना मैं तुझे ,ना समझी थी मेरी ..
देखा जो तुने आँखों में,पढकर उन्हें मैं आ रहा हूँ ..
ख़ामोशी थी फितरत में मेरी ,बोलना तेरा अखरा मुझे ..
फितरत आज बदलकर अपनी मैं आ रहा हूँ ..
फ़ाख़िर था मैं ,दिल दुखाया तेरा ..
पशेमान हुए आज मैं आ रहा हूँ ..
खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..
(प्रतीक त्यागी )
postingan yang bagus
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