Pages

Tuesday, 24 July 2012

खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?

खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..

दर्द एक दबा था सालो से जो दिल में ..
जगाकर आज उसे मैं आ रहा हूँ..

तुने तो कह दिया नाराज़ नहीं तू मुझसे ..
मैंने सोचा मैं तुझे मनाकर आ रहा हूँ ..

याद अब भी मुझे करना तेरा ,अच्छा लगा मुझे ..
याद तुझे मैं भी करता करता आ रहा हूँ ..

समझा ना मैं तुझे ,ना समझी थी मेरी ..
देखा जो तुने आँखों में,पढकर उन्हें मैं आ रहा हूँ ..

ख़ामोशी थी फितरत में मेरी ,बोलना तेरा अखरा मुझे ..
फितरत आज बदलकर अपनी मैं आ रहा हूँ ..

फ़ाख़िर था मैं ,दिल दुखाया तेरा ..
पशेमान हुए आज मैं आ रहा हूँ ..

खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..
 
(प्रतीक  त्यागी )

1 comment: