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Wednesday, 25 July 2012

तू है अगर सर्वव्यापी ,तब मैं भी हूँ तेरा ही अंश ..

हे प्रभु हे दाता !
तू है सर्वव्यापी सर्व ज्ञाता !
जब आना नहीं हमे दुनिया में
फिर क्यों है गर्भ में भेजा जाता..??

क्यों मानव मेरे होने से घबराते है ..??
जब सब अपने भाग्य का लेकर आते है..
आई नहीं इस दुनिया में,नही मुझे अफ़सोस..
पापी बसे है धरती पर,तू क्यों है खामोश ..??

तू है अगर सर्वव्यापी ,तब मैं भी हूँ तेरा ही अंश ..
फिर क्यों मुझे मारा जाता,मिलता तुझे भी दंश ..
मारा जाता है मुझे, तुझे है पूजा जाता..
दुनिया में मुझे तुझसे प्रथक समझा जाता ..

फिर कन्या पूजन का क्या अर्थ निकलता है ??
इस ढोंग दिखावे से दुनिया को क्या मिलता है..??
कैसा विरोधाभास है प्रभु,तेरी व्यापकता पर भी प्रसन्न चिन्ह है ..
जानना है मुझे अब है हम एक ही या फिर भिन्न भिन्न है ??

हे प्रभु हे दाता तू है कृपा निधान
मेरी इस व्यथा का अब कर स्थायी समाधान 


(प्रतीक त्यागी )

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