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Wednesday, 11 July 2012

आती है वो जाती है वो ,जाने क्या चाहती है वो !

आती है वो जाती है वो ,जाने क्या चाहती है वो !
चुप चुप सी रहती है ,और कहना भी कुछ चाहती है वो !!

चाहती है वो मुझे ,और इनकार भी करती है ..!
पूछो तो मुकर जाती है ,और मोहब्बत का अपनी ऐलान भी करती है..!!
 
सामने आने से करती है मना,और चिलमन उठा भी देती है !
ख्याल रखती है मेरा बहुत,और आँखों से गिरा भी देती है ..!!

गुमान करती है खुद पर ,और मेरी ख्वाहिश भी रखती है !
हो न जाऊ खफा मैं कहीं ,इतनी गुंजाईश भी रखती है ..!!

रहती है खफा मुझसे ,और इबादतो में भी रखती है !
हो न जाऊ मैं दूर कहीं,इतनी ऐहतियात भी रखती है ..!!

रखती है इख़्तियार मुझ पर,और किनारा दिखा भी देती है !
छोड़ जाती है मुझे तन्हा,और सहारा जता भी देती है ..!!


करती है ऐतबार मुझ पर ,और मेरी आजमाइश भी करती है !
लेती है इम्तिहान मेरा,और महोब्बत की फरमाइश भी करती है ..!!
(प्रतीक  त्यागी )
 

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