लो आज फिर एक फूल टूट गया जीवन की इस डाली से ..
फिर आज हृदय है विचलित माँ बहनों की इस बदहाली से..
फिर छली गयी एक गुडिया इन वहशी जालिम हत्यारों से..
अब आवाज उठाओ, उठो जागो उन करुण चीख पुकारो से..
है शर्मसार मानवता,मानव के भेष में इन पिशाच मक्कारों से
धरती माँ की अब सुन लो पुकार, दब रही इन गुनहगारों से
मानव निर्माण की पहली कड़ी है जार जार अपनी बदहाली से
लो आज फिर एक फूल टूट गया जीवन की इस डाली से .
सब को जगाने वाली सो गयी तुम चिर निद्रा में दामिनी..
रहोगी तुम जीवित सदा दिलो में ,व्यर्थ न जायेगी ये कुर्बानी...
Sunday, 30 December 2012
Sunday, 5 August 2012
भागती दौड़ती इस जिंदगी में सुकून है दोस्त ..
भागती दौड़ती इस जिंदगी में सुकून है दोस्त ..
यूँ मेरे दोस्तों में बस गया हूँ मैं ..
अब रगों में मेरी दौड़ता खून है दोस्त..
हारने नहीं देता जो मुश्किलों में मुझे कभी ..
मेरे लिए मेरा जूनून है दोस्त..
तेरा मेरा अपना पराया कुछ भी नहीं ..
दोस्ती में एक आसमान है दोस्त..
दोस्ती में हो दुःख दर्द या मुसीबत कोई ..
यकीं रख धरती पर भगवान है दोस्त ..
दोस्त सिर्फ कह मत,दोस्ती निभा दिल से ..
फिर देख दोस्ती में कैसे दिल और जान है दोस्त ....
(प्रतीक त्यागी )
मेरे लिए मेरा जूनून है दोस्त..
तेरा मेरा अपना पराया कुछ भी नहीं ..
दोस्ती में एक आसमान है दोस्त..
दोस्ती में हो दुःख दर्द या मुसीबत कोई ..
यकीं रख धरती पर भगवान है दोस्त ..
दोस्त सिर्फ कह मत,दोस्ती निभा दिल से ..
फिर देख दोस्ती में कैसे दिल और जान है दोस्त ....
Tuesday, 31 July 2012
That short talk.....
Memories of you I keep,is all my treasure
That Few seconds with you,gave me pleasure
Though some time it pins me like a crampon
But I can't stop to remember you,as I Sworn
In your eyes,I saw my present,future and past
I know,the time you looked at me,that was last
The day came first,I thought we would be Friend
Who knew but God,how soon It will result to end
You are near me,regardless the distance of miles
Keeping in my heart,your face with charming Smiles
Want to give you my all,and expect nothing in return
But its you and always will be,for whom I yearn
You are in my dream,reality is as high as sky
But I will love you until the day I will die
In life I am a passerby,and My job is to walk
Remember the time you met last,and that short talk.....That Few seconds with you,gave me pleasure
Though some time it pins me like a crampon
But I can't stop to remember you,as I Sworn
In your eyes,I saw my present,future and past
I know,the time you looked at me,that was last
The day came first,I thought we would be Friend
Who knew but God,how soon It will result to end
You are near me,regardless the distance of miles
Keeping in my heart,your face with charming Smiles
Want to give you my all,and expect nothing in return
But its you and always will be,for whom I yearn
You are in my dream,reality is as high as sky
But I will love you until the day I will die
In life I am a passerby,and My job is to walk
(PRATEEK TYAGI)
Wednesday, 25 July 2012
तू है अगर सर्वव्यापी ,तब मैं भी हूँ तेरा ही अंश ..
हे प्रभु हे दाता !
तू है सर्वव्यापी सर्व ज्ञाता !
जब आना नहीं हमे दुनिया में
फिर क्यों है गर्भ में भेजा जाता..??
क्यों मानव मेरे होने से घबराते है ..??
जब सब अपने भाग्य का लेकर आते है..
आई नहीं इस दुनिया में,नही मुझे अफ़सोस..
पापी बसे है धरती पर,तू क्यों है खामोश ..??
तू है अगर सर्वव्यापी ,तब मैं भी हूँ तेरा ही अंश ..
फिर क्यों मुझे मारा जाता,मिलता तुझे भी दंश ..
मारा जाता है मुझे, तुझे है पूजा जाता..
दुनिया में मुझे तुझसे प्रथक समझा जाता ..
फिर कन्या पूजन का क्या अर्थ निकलता है ??
इस ढोंग दिखावे से दुनिया को क्या मिलता है..??
कैसा विरोधाभास है प्रभु,तेरी व्यापकता पर भी प्रसन्न चिन्ह है ..
जानना है मुझे अब है हम एक ही या फिर भिन्न भिन्न है ??
हे प्रभु हे दाता तू है कृपा निधान
मेरी इस व्यथा का अब कर स्थायी समाधान
(प्रतीक त्यागी )
तू है सर्वव्यापी सर्व ज्ञाता !
जब आना नहीं हमे दुनिया में
फिर क्यों है गर्भ में भेजा जाता..??
क्यों मानव मेरे होने से घबराते है ..??
जब सब अपने भाग्य का लेकर आते है..
आई नहीं इस दुनिया में,नही मुझे अफ़सोस..
पापी बसे है धरती पर,तू क्यों है खामोश ..??
तू है अगर सर्वव्यापी ,तब मैं भी हूँ तेरा ही अंश ..
फिर क्यों मुझे मारा जाता,मिलता तुझे भी दंश ..
मारा जाता है मुझे, तुझे है पूजा जाता..
दुनिया में मुझे तुझसे प्रथक समझा जाता ..
फिर कन्या पूजन का क्या अर्थ निकलता है ??
इस ढोंग दिखावे से दुनिया को क्या मिलता है..??
कैसा विरोधाभास है प्रभु,तेरी व्यापकता पर भी प्रसन्न चिन्ह है ..
जानना है मुझे अब है हम एक ही या फिर भिन्न भिन्न है ??
हे प्रभु हे दाता तू है कृपा निधान
मेरी इस व्यथा का अब कर स्थायी समाधान
(प्रतीक त्यागी )
Tuesday, 24 July 2012
खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..
दर्द एक दबा था सालो से जो दिल में ..
जगाकर आज उसे मैं आ रहा हूँ..
तुने तो कह दिया नाराज़ नहीं तू मुझसे ..
मैंने सोचा मैं तुझे मनाकर आ रहा हूँ ..
याद अब भी मुझे करना तेरा ,अच्छा लगा मुझे ..
याद तुझे मैं भी करता करता आ रहा हूँ ..
समझा ना मैं तुझे ,ना समझी थी मेरी ..
देखा जो तुने आँखों में,पढकर उन्हें मैं आ रहा हूँ ..
ख़ामोशी थी फितरत में मेरी ,बोलना तेरा अखरा मुझे ..
फितरत आज बदलकर अपनी मैं आ रहा हूँ ..
फ़ाख़िर था मैं ,दिल दुखाया तेरा ..
पशेमान हुए आज मैं आ रहा हूँ ..
खोकर तुझे या पाकर मैं आ रहा हूँ ?
आँसू आज अपने बहाकर मैं आ रहा हूँ ..
(प्रतीक त्यागी )
Remembering the time....
Remembering the time i rebuffed to you
Now It causes the pain,hurts me too
I don't know,can't say what I was doing
what I was showing or what I was proving.
For the things I've done,I've nothing to say
I regret for that,every second of the day
The Pain You were given,I can't heal
But the crime I have commit i can feel
Now I wish to tell you for what i abide
something deep in my heart,I can't hide
Just to tell that Its you where I belong
I'll Never giveup,you make me feel strong
Being far from you,nothing goes right
Miss you always,you'll be in my sight
By the time I realized,It was too late
Waiting,knowing you are not in my fate
You'll Stay forever in my heart's chamber
I'll never forget,you'll never remember
creeping in my veins,in eyes always shine
though in my dreams you are always mine
(Prateek Tyagi)
Wednesday, 11 July 2012
आती है वो जाती है वो ,जाने क्या चाहती है वो !
आती है वो जाती है वो ,जाने क्या चाहती है वो !
चुप चुप सी रहती है ,और कहना भी कुछ चाहती है वो !!
चाहती है वो मुझे ,और इनकार भी करती है ..!
पूछो तो मुकर जाती है ,और मोहब्बत का अपनी ऐलान भी करती है..!!
सामने आने से करती है मना,और चिलमन उठा भी देती है !
ख्याल रखती है मेरा बहुत,और आँखों से गिरा भी देती है ..!!
गुमान करती है खुद पर ,और मेरी ख्वाहिश भी रखती है !
हो न जाऊ खफा मैं कहीं ,इतनी गुंजाईश भी रखती है ..!!
रहती है खफा मुझसे ,और इबादतो में भी रखती है !
हो न जाऊ मैं दूर कहीं,इतनी ऐहतियात भी रखती है ..!!
रखती है इख़्तियार मुझ पर,और किनारा दिखा भी देती है !
छोड़ जाती है मुझे तन्हा,और सहारा जता भी देती है ..!!
करती है ऐतबार मुझ पर ,और मेरी आजमाइश भी करती है !
लेती है इम्तिहान मेरा,और महोब्बत की फरमाइश भी करती है ..!!
(प्रतीक त्यागी )
Friday, 11 May 2012
तेरा आशियाना मालूम है मुझे और ..
तेरा आशियाना मालूम है मुझे और ..
राहों में टकराना भी अच्छा लगता है !!
यूँ पलकों को उठाना ,यूँ नजरो को मिलाना ..
तेरी आँखों में डूब जाना भी अच्छा लगता है !!
यूँ नजरो को बचाना,यूँ पलकों को झुकाना
शरमा कर तेरा मुस्कुराना भी अच्छा लगता है !!
कहा तुझसे कभी कुछ भी नहीं और
तुझसे बतियाना भी अच्छा लगता है !!
जुस्तजू नहीं है मुझे तेरी और
इत्तिफ़ाक़न तुझे पाना भी अच्छा लगता है !!
आरजू भी नहीं है मिलने की तुझसे और
ख्वाबों में तेरा आना भी अच्छा लगता है !!
हकीकत से हूँ वाकिफ़ मैं और
तेरे इंतज़ार में रहना भी अच्छा लगता है !!
तू नही मुझे हासिल जानता हूँ मैं और
आब-ए-चश्म लिए मुस्कुराना भी अच्छा लगता है !!
नींदों से नहीं अब ताल्लुकात कुछ भी और
रातो को करवटें बदलना भी अच्छा लगता है !!
कुछ यूँ खो गया तसव्वुर में मैं तेरे की
खोना भी अच्छा लगता है,तुझे पाना भी अच्छा लगता है !
गज़लों में तुझे अब गुनगुनाना भी अच्छा लगता है !!
(प्रतीक त्यागी )
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